फॉस्फोरस जड़ों के गहरे विकास को बढ़ावा देता है, जिससे फसल को नमी की कमी (सूखे के तनाव) को सहन करने और मिट्टी के पोषक तत्वों का कुशलतापूर्वक उपयोग करने में मदद मिलती है।
शुरुआती विकास और कल्ले निकलना
यह ऊर्जा हस्तांतरण (ATP) में सहायता करता है, जिससे पौधों को शुरुआती चरणों में बेहतर मजबूती मिलती है और कल्ले अधिक संख्या में निकलते हैं।
दानों का बनना और उपज
पर्याप्त मात्रा में फॉस्फोरस मिलने से सिट्टा/बाली का विकास बेहतर होता है, दानों का भराव अच्छे से होता है और कुल उपज में वृद्धि होती है।