अरहर

अरहर भारत की महत्वपूर्ण दलहन फसलों में से एक है और भोजन में पौधों से मिलने वाले प्रोटीन का एक प्रमुख स्रोत है।
यह वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करके उसकी उर्वरता बढ़ाती है, जिससे फसल चक्र में इसका महत्व बहुत बढ़ जाता है।
अरहर तुलनात्मक रूप से सूखा-सहनशील भी है, इसलिए यह वर्षा आधारित और कम लागत वाली खेती प्रणालियों के लिए बिल्कुल उपयुक्त है।

आपके अरहर को फॉस्फोरस की आवश्यकता क्यों है?

जड़ों का विकास और
गांठों का बनना

फॉस्फोरस जड़ों के मजबूत विकास को बढ़ावा देता है और राइजोबियम बैक्टीरिया की सक्रियता को बढ़ाता है, जो मिट्टी में प्रभावी ढंग से नाइट्रोजन स्थिरीकरण के लिए बेहद जरूरी है।

ऊर्जा हस्तांतरण और
शुरुआती विकास

यह ATP के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे पौधों को शुरुआती मजबूती मिलती है और फसल बेहतर तरीके से स्थापित होती है।

फूल आना और
फलियाँ बनना

पर्याप्त मात्रा में फॉस्फोरस मिलने से फूल आने, फलियाँ बनने और दानों के विकास में सुधार होता है, जिससे अंततः अधिक उपज मिलती है।
आंध्र प्रदेश बिहार झारखंड महाराष्ट्र उत्तर प्रदेश

अरहर

खाद की सही मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)

नाइट्रोजन

40

फॉस्फोरस

50

सूक्ष्मपोषक

अनुपलब्ध

TSP डोज़: P की आवश्यकता हेतु (किलो प्रति हेक्टेयर)

डोज़

109

इस्तेमाल का सही तरीका

बुआई के समय, इसे बिखेरकर या सही जगह पर रखकर डालें

चयनित राज्य: आंध्र प्रदेश

मुख्य उत्पादक राज्य: उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र

स्रोत: फसल की जानकारी

स्रोत: राज्यानुसार जानकारी