मूँग भारत की एक महत्वपूर्ण दलहन फसल है और देश की प्रोटीन की ज़रूरतों को पूरा करने में मदद करती है।
यह फसल नाइट्रोजन स्थिरीकरण के माध्यम से प्राकृतिक रूप से मिट्टी को उपजाऊ बनाती है और अगली फसल के लिए रासायनिक उर्वरकों (खाद) की आवश्यकता को कम करती है।
कम समय की अवधि की होने के कारण यह फसल विविधीकरण और किसानों को अतिरिक्त आय दिलाने के लिए बेहद उपयोगी है।
फॉस्फोरस जड़ों के मजबूत विकास को बढ़ावा देता है और जड़ों में गांठों के बनने की प्रक्रिया को तेज करता है, जो जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण के लिए बेहद जरूरी है।
ऊर्जा हस्तांतरण और शुरुआती विकास
यह ATP के निर्माण के लिए आवश्यक है, जिससे पौधों को शुरुआती मजबूती मिलती है और फसल बेहतर तरीके से स्थापित होती है।
उपज और फलियों का विकास
पर्याप्त मात्रा में फॉस्फोरस मिलने से फूल आने, फलियाँ बनने और दानों के विकास में सुधार होता है, जिससे कुल उपज बढ़ती है।