बाजरा

बाजरा भारत की एक महत्वपूर्ण अनाज फसल है और विशेष रूप से सूखे व कम वर्षा वाले क्षेत्रों में इसे अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
यह सूखा-सहनशील है और कठिन परिस्थितियों में भी जलवायु-अनुकूल खेती को बनाए रखने में मदद करता है।
पोषण के नजरिए से भी बाजरा काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शरीर को ऊर्जा, फाइबर और जरूरी खनिज प्रदान करता है।

आपके बाजरा को फॉस्फोरस की आवश्यकता क्यों है?

जड़ों का विकास और
सूखा सहनशीलता

फॉस्फोरस जड़ों के गहरे विकास को बढ़ावा देता है, जिससे फसल को नमी की कमी (सूखे के तनाव) को सहन करने और मिट्टी के पोषक तत्वों का कुशलतापूर्वक उपयोग करने में मदद मिलती है।

शुरुआती विकास और
कल्ले निकलना

यह ऊर्जा हस्तांतरण (ATP) में सहायता करता है, जिससे पौधों को शुरुआती चरणों में बेहतर मजबूती मिलती है और कल्ले अधिक संख्या में निकलते हैं।

दानों का बनना
और उपज

पर्याप्त मात्रा में फॉस्फोरस मिलने से सिट्टा/बाली का विकास बेहतर होता है, दानों का भराव अच्छे से होता है और कुल उपज में वृद्धि होती है।
हरियाणा Maharashtra Rajasthan

बाजरा

खाद की सही मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)

नाइट्रोजन

60

फॉस्फोरस

30

पोटेशियम

30

सूक्ष्मपोषक

अनुपलब्ध

TSP डोज़: P की आवश्यकता हेतु (किलो प्रति हेक्टेयर)

डोज़

66

इस्तेमाल का सही तरीका

छिटककर बुआई करते समय

चयनित राज्य: राजस्थान

मुख्य उत्पादक राज्य: हरियाणा, राजस्थान

स्रोत: फसल की जानकारी

स्रोत: राज्यानुसार जानकारी